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mahabharat 12.20.3: हे पुरुषों के राजा! अजातशत्रु! आपने धर्म के अनुसार इस सम्पूर्ण जगत को जीत लिया है। इसे जीतकर फिर व्यर्थ ही त्याग देना आपके लिए उचित नहीं है।॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.20: मुनिवर देवस्थानका राजा युधिष्ठिरको यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 20: मुनिवर देवस्थानका राजा युधिष्ठिरको यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.20.3 
अजातशत्रो धर्मेण कृत्स्ना ते वसुधा जिता।
तां जित्वा च वृथा राजन् न परित्यक्तुमर्हसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषों के राजा! अजातशत्रु! आपने धर्म के अनुसार इस सम्पूर्ण जगत को जीत लिया है। इसे जीतकर फिर व्यर्थ ही त्याग देना आपके लिए उचित नहीं है।॥3॥
 
O king of men! Ajatashatru! You have conquered this entire world according to Dharma. It is not right for you to conquer it and then abandon it in vain. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)