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श्लोक 12.20.3  |
अजातशत्रो धर्मेण कृत्स्ना ते वसुधा जिता।
तां जित्वा च वृथा राजन् न परित्यक्तुमर्हसि॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| हे पुरुषों के राजा! अजातशत्रु! आपने धर्म के अनुसार इस सम्पूर्ण जगत को जीत लिया है। इसे जीतकर फिर व्यर्थ ही त्याग देना आपके लिए उचित नहीं है।॥3॥ |
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| O king of men! Ajatashatru! You have conquered this entire world according to Dharma. It is not right for you to conquer it and then abandon it in vain. ॥ 3॥ |
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