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श्लोक 12.20.2  |
देवस्थान उवाच
यद् वच: फाल्गुनेनोक्तं न ज्यायोऽस्ति धनादिति।
अत्र ते वर्तयिष्यामि तदेकान्तमना: शृणु॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| देवस्थान बोला- राजन! अर्जुन ने कहा है कि 'धन से बढ़कर कोई वस्तु नहीं है।' मैं भी तुम्हें इसके विषय में कुछ बताता हूँ। तुम ध्यानपूर्वक सुनो। |
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| Devasthan said- King! Arjun has said that 'there is nothing more valuable than wealth'. I will also tell you something about this. Listen with full attention. |
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