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mahabharat 12.20.10: ब्रह्मा ने यज्ञ के लिए ही धन की रचना की है और यज्ञ के लिए ही उसकी रक्षा करने वाले को भी उत्पन्न किया है, इसलिए समस्त धन को यज्ञ में ही लगाना चाहिए। तब (उस यज्ञ से ही) यजमान की समस्त कामनाएँ शीघ्र ही पूरी हो जाती हैं॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.20: मुनिवर देवस्थानका राजा युधिष्ठिरको यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 20: मुनिवर देवस्थानका राजा युधिष्ठिरको यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.20.10 
यज्ञाय सृष्टानि धनानि धात्रा
यज्ञोद्दिष्ट: पुरुषो रक्षिता च।
तस्मात् सर्वं यज्ञ एवोपयोज्यं
धनं ततोऽनन्तर एव काम:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा ने यज्ञ के लिए ही धन की रचना की है और यज्ञ के लिए ही उसकी रक्षा करने वाले को भी उत्पन्न किया है, इसलिए समस्त धन को यज्ञ में ही लगाना चाहिए। तब (उस यज्ञ से ही) यजमान की समस्त कामनाएँ शीघ्र ही पूरी हो जाती हैं॥ 10॥
 
‘Brahma has created wealth for the purpose of Yagya and he has created the person who protects it for the purpose of Yagya only, therefore all the wealth should be used in Yagya only. Then very soon (by that Yagya only) all the desires of the Yajamana are fulfilled.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)