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mahabharat 12.2.6-7: राजन! भीमसेन का बल, अर्जुन की चपलता, आपकी बुद्धिमत्ता, नकुल और सहदेव की विनम्रता, गाण्डीवधारी अर्जुन और श्रीकृष्ण की बाल्यकाल की मित्रता तथा पाण्डवों के प्रति प्रजा का स्नेह देखकर वे चिन्तित और ईर्ष्यालु रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 12.2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  12.2.6-7 
स बलं भीमसेनस्य फाल्गुनस्य च लाघवम्।
बुद्धिं च तव राजेन्द्र यमयोर्विनयं तदा॥ ६॥
सख्यं च वासुदेवेन बाल्ये गाण्डीवधन्वन:।
प्रजानामनुरागं च चिन्तयानो व्यदह्यत॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजन! भीमसेन का बल, अर्जुन की चपलता, आपकी बुद्धिमत्ता, नकुल और सहदेव की विनम्रता, गाण्डीवधारी अर्जुन और श्रीकृष्ण की बाल्यकाल की मित्रता तथा पाण्डवों के प्रति प्रजा का स्नेह देखकर वे चिन्तित और ईर्ष्यालु रहते थे।
 
King! He used to be worried and jealous seeing the strength of Bhimasena, the agility of Arjuna, your intelligence, the humility of Nakula and Sahadeva, the childhood friendship of Gandiva wielding Arjuna with Sri Krishna and the affection of the people for the Pandavas. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)