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mahabharat 12.2.5: वही तेजस्वी बालक सारथीपुत्र के रूप में प्रसिद्ध हुआ। उसने अंगिरा गोत्र के श्रेष्ठ ब्राह्मण गुरु द्रोणाचार्य से धनुर्वेद की शिक्षा ली।   |   mahabharat अध्याय 12.2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.2.5 
स बालस्तेजसा युक्त: सूतपुत्रत्वमागत:।
चकाराङ्गिरसां श्रेष्ठाद् धनुर्वेदं गुरोस्तदा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वही तेजस्वी बालक सारथीपुत्र के रूप में प्रसिद्ध हुआ। उसने अंगिरा गोत्र के श्रेष्ठ ब्राह्मण गुरु द्रोणाचार्य से धनुर्वेद की शिक्षा ली।
 
The same brilliant boy became famous as the son of a charioteer. He learnt Dhanurveda from Guru Dronacharya, the best among the Angira gotra Brahmins. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)