Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.2.4: हे प्रभु! एक बार देवताओं ने विचार किया कि ऐसा कौन-सा उपाय हो सकता है जिससे संसार का समस्त क्षत्रिय समुदाय अस्त्र-शस्त्रों के प्रहार से पवित्र होकर स्वर्गलोक को प्राप्त हो सके। ऐसा विचार करके उन्होंने सूर्यदेव से कुमारी कुन्ती के गर्भ से एक तेजस्वी बालक उत्पन्न करवाया, जो संघर्ष का जनक हुआ॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षत्रं स्वर्गं कथं गच्छेच्छस्त्रपूतमिति प्रभो।
संघर्षजननस्तस्मात् कन्यागर्भो विनिर्मित:॥ ४॥
अनुवाद
हे प्रभु! एक बार देवताओं ने विचार किया कि ऐसा कौन-सा उपाय हो सकता है जिससे संसार का समस्त क्षत्रिय समुदाय अस्त्र-शस्त्रों के प्रहार से पवित्र होकर स्वर्गलोक को प्राप्त हो सके। ऐसा विचार करके उन्होंने सूर्यदेव से कुमारी कुन्ती के गर्भ से एक तेजस्वी बालक उत्पन्न करवाया, जो संघर्ष का जनक हुआ॥4॥
O Lord! Once the gods thought about what could be the means by which the entire Kshatriya community of the world could be purified by the attack of weapons and reach heaven. Thinking this, they caused the Sun to produce a brilliant child from the womb of Kumari Kunti, who became the father of conflict.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥