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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.2.3 
गुह्यमेतत् तु देवानां कथयिष्यामि तेऽनघ।
तन्निबोध महाबाहो यथा वृत्तमिदं पुरा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अनघ! यह देवताओं का एक रहस्य है जो मैं तुम्हें बता रहा हूँ। हे महाबाहु! इस अतीत की सच्ची कथा को ध्यानपूर्वक सुनो।
 
Anagha! This is a secret of the gods which I am telling you. O mighty-armed one! Listen attentively to this true story of the past.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)