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mahabharat 12.2.29: ब्राह्मण के ऐसा कहने पर कर्ण बहुत भयभीत हो गया। उसने विनम्रतापूर्वक अपना सिर झुका लिया। मन ही मन यह विचार करते हुए वह परशुराम के पास लौट आया।   |   mahabharat अध्याय 12.2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.2.29 
इत्युक्तो ब्राह्मणेनाथ कर्णो दैन्यादधोमुख:।
राममभ्यगमद् भीतस्तदेव मनसा स्मरन्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण के ऐसा कहने पर कर्ण बहुत भयभीत हो गया। उसने विनम्रतापूर्वक अपना सिर झुका लिया। मन ही मन यह विचार करते हुए वह परशुराम के पास लौट आया।
 
Karna was very frightened when the Brahmin said this. He bowed his head in humility. Thinking about this in his mind, he returned to Parshuram.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि कर्णशापो नाम द्वितीयोऽध्याय:॥ २॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें कर्णको ब्राह्मणका शापनामक दूसरा अध्याय पूरा हुआ॥ २॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)