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mahabharat 12.2.28: ‘यदि सारा संसार भी यहाँ आ जाए, तो भी कोई मेरे वचनों को झूठा सिद्ध नहीं कर सकता। तुम या तो यहाँ से चले जाओ या यहीं रहो या जो चाहो करो।’॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.2.28 
न हि मेऽव्याहृतं कुर्यात् सर्वलोकोऽपि केवलम्।
गच्छ वा तिष्ठ वा यद् वा कार्यं ते तत् समाचर॥ २८॥
 
 
अनुवाद
‘यदि सारा संसार भी यहाँ आ जाए, तो भी कोई मेरे वचनों को झूठा सिद्ध नहीं कर सकता। तुम या तो यहाँ से चले जाओ या यहीं रहो या जो चाहो करो।’॥28॥
 
‘Even if the whole world comes here, no one can prove my words false. You either go from here or stay here or do whatever you want to do.’॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)