शप्त: प्रसादयामास कर्णस्तं द्विजसत्तमम्।
गोभिर्धनैश्च रत्नैश्च स चैनं पुनरब्रवीत्॥ २७॥
अनुवाद
इस शाप को पाकर कर्ण ने उस श्रेष्ठ ब्राह्मण को बहुत सी गौएँ, धन और रत्न देकर प्रसन्न करने का प्रयत्न किया, तब उसने पुनः इस प्रकार उत्तर दिया -॥27॥
After receiving this curse, Karna tried to please that great Brahmin by giving him many cows, money and gems. Then he again replied in this manner -॥27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥