श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.2.26 
यथेयं गौर्हता मूढ प्रमत्तेन त्वया मम।
प्रमत्तस्य तथाराति: शिरस्ते पातयिष्यति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
"अरे मूर्ख! जैसे तूने बिना सावधान हुए इस गाय को मार डाला, वैसे ही शत्रु भी बिना सावधान हुए तेरा सिर काट डालेगा।" ॥26॥
 
"Oh fool! Just as you killed this cow without being careful, in the same way the enemy will cut off your head without being careful." ॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)