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mahabharat 12.2.22: "हे प्रभु! मैंने अनजाने में आपकी गाय को मार डाला है, अतः कृपया इस अपराध के लिए मुझे क्षमा करें और मुझ पर कृपा करें," कर्ण ने यह बात बार-बार दोहराई।   |   mahabharat अध्याय 12.2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.2.22 
अबुद्धिपूर्वं भगवन् धेनुरेषा हता तव।
मया तत्र प्रसादं च कुरुष्वेति पुन: पुन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
"हे प्रभु! मैंने अनजाने में आपकी गाय को मार डाला है, अतः कृपया इस अपराध के लिए मुझे क्षमा करें और मुझ पर कृपा करें," कर्ण ने यह बात बार-बार दोहराई।
 
"O Lord! I have unknowingly killed your cow, so please forgive me for this crime and be kind to me," Karna repeated this again and again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)