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mahabharat 12.2.20: पार्थ! उस समय अग्निहोत्र करते समय एक वेद-अध्ययन करने वाले ब्राह्मण द्वारा बलि दी गई गाय वहाँ आ गई। अनजाने में ही उसने उस गाय को (उसे क्रूर पशु समझकर) अचानक मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 12.2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.2.20 
सोऽग्निहोत्रप्रसक्तस्य कस्यचिद् ब्रह्मवादिन:।
जघानाज्ञानत: पार्थ होमधेनुं यदृच्छया॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! उस समय अग्निहोत्र करते समय एक वेद-अध्ययन करने वाले ब्राह्मण द्वारा बलि दी गई गाय वहाँ आ गई। अनजाने में ही उसने उस गाय को (उसे क्रूर पशु समझकर) अचानक मार डाला।
 
Parth! At that time, the cow sacrificed by a Brahmin who had studied Vedas came there while he was performing Agnihotra. Unknowingly, he suddenly killed that cow (thinking it to be a ferocious animal).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)