श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.2.19 
स कदाचित् समुद्रान्ते विचरन्नाश्रमान्तिके।
एक: खड्गधनुष्पाणि: परिचक्राम सूर्यज:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
एक समय की बात है, सूर्यपुत्र कर्ण आश्रम के निकट समुद्रतट पर हाथ में धनुष-बाण और तलवार लिए अकेले ही विहार कर रहे थे॥19॥
 
Once upon a time, Suryaputra Karna was strolling alone with his bow and arrow and sword in his hands on the seashore near the Ashram.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)