Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.2.17: स्वर्ग के समान सुन्दर उस महेन्द्र पर्वत पर रहते हुए कर्ण को गन्धर्वों, राक्षसों, यक्षों और देवताओं से मिलने का अवसर मिलता रहता था ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.2.17 
तत्र कर्णस्य वसतो महेन्द्रे स्वर्गसंनिभे।
गन्धर्वै राक्षसैर्यक्षैर्देवैश्चासीत् समागम:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ग के समान सुन्दर उस महेन्द्र पर्वत पर रहते हुए कर्ण को गन्धर्वों, राक्षसों, यक्षों और देवताओं से मिलने का अवसर मिलता रहता था ॥17॥
 
While living on that Mahendra mountain, which was beautiful like heaven, Karna used to get the opportunity to meet Gandharvas, Rakshasas, Yakshas and Gods. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)