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mahabharat 12.2.16: परशुराम ने उसके वंश और अन्य विवरण पूछने के बाद उसे अपना शिष्य स्वीकार कर लिया और कहा, "पुत्र! तुम यहीं रहो। तुम्हारा स्वागत है।" ऐसा कहकर ऋषि उससे बहुत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 12.2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.2.16 
रामस्तं प्रतिजग्राह पृष्ट्वा गोत्रादि सर्वश:।
उष्यतां स्वागतं चेति प्रीतिमांश्चाभवद् भृशम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
परशुराम ने उसके वंश और अन्य विवरण पूछने के बाद उसे अपना शिष्य स्वीकार कर लिया और कहा, "पुत्र! तुम यहीं रहो। तुम्हारा स्वागत है।" ऐसा कहकर ऋषि उससे बहुत प्रसन्न हुए।
 
After asking about his lineage and other details, Parasurama accepted him as his disciple and said, "Son! You stay here. You are welcome." Saying this, the sage was very pleased with him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)