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mahabharat 12.2.1: वैशम्पायन जी कहते हैं: हे राजन! युधिष्ठिर के पूछने पर वक्ताओं में श्रेष्ठ नारद मुनि ने सारथी पुत्र कर्ण को शाप मिलने का सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनाया।   |   mahabharat अध्याय 12.2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 2: नारदजीका कर्णको शाप प्राप्त होनेका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.2.1 
वैशम्पायन उवाच
स एवमुक्तस्तु मुनिर्नारदो वदतां वर:।
कथयामास तत् सर्वं यथा शप्त: स सूतज:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं: हे राजन! युधिष्ठिर के पूछने पर वक्ताओं में श्रेष्ठ नारद मुनि ने सारथी पुत्र कर्ण को शाप मिलने का सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनाया।
 
Vaishmpayana says: O King! On Yudhishthira's questioning, the great sage Narad, the best among orators, narrated the entire incident of how the son of a charioteer Karna was cursed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)