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mahabharat 12.199.97: हे मनुष्यों के स्वामी! इस प्रकार आपस में वाद-विवाद करते हुए हम आपके पास आए हैं। कृपया निर्णय करें। अब आप न्याय करें या अन्याय। कृपया इस विवाद का निपटारा करें। हम दोनों को विशेष न्याय के मार्ग पर लगाएँ॥ 97॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  12.199.97 
एवं विवदमानौ स्वस्त्वामिहाभ्यागतौ नृप।
कुरु धर्ममधर्मं वा विनये नौ समादध॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! इस प्रकार आपस में वाद-विवाद करते हुए हम आपके पास आए हैं। कृपया निर्णय करें। अब आप न्याय करें या अन्याय। कृपया इस विवाद का निपटारा करें। हम दोनों को विशेष न्याय के मार्ग पर लगाएँ॥ 97॥
 
O Lord of men! Arguing with each other in this manner, we have come to you. Please decide. Now you may do justice or injustice. Please settle this dispute. Put both of us on the path of special justice.॥ 97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)