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mahabharat 12.199.91: विरूप ने कहा - राजन! मनुष्यों के स्वामी! हे राजन! ध्यानपूर्वक सुनो! मैं तुम्हें इस विरथ का ऋण किस प्रकार वहन करता हूँ, यह सब विस्तारपूर्वक बता रहा हूँ॥ 91॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  12.199.91 
विरूप उवाच
शृणुष्वावहितो राजन् यथैतद् धारयाम्यहम्।
विकृतस्यास्य राजर्षे निखिलेन नराधिप॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
विरूप ने कहा - राजन! मनुष्यों के स्वामी! हे राजन! ध्यानपूर्वक सुनो! मैं तुम्हें इस विरथ का ऋण किस प्रकार वहन करता हूँ, यह सब विस्तारपूर्वक बता रहा हूँ॥ 91॥
 
Virupa said - King! Lord of men! Listen carefully, O king! I am telling you in full detail the way in which I bear the debt of this virutha.॥ 91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)