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mahabharat 12.199.90: राजा ने कहा, "विरूप! विकृतीकृत पर तुम्हारा क्या ऋण है? बताओ, मैं उसकी बात सुनूँगा और फिर निर्णय करूँगा। मैंने यही निर्णय लिया है।"   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  12.199.90 
राजोवाच
विरूप किं धारयते भवानस्य ब्रवीतु मे।
श्रुत्वा तथा करिष्येऽहमिति मे धीयते मन:॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा, "विरूप! विकृतीकृत पर तुम्हारा क्या ऋण है? बताओ, मैं उसकी बात सुनूँगा और फिर निर्णय करूँगा। मैंने यही निर्णय लिया है।"
 
The king said, "Virup! What debt does Vikrutikrut owe you? Tell me, I will listen to him and then take a decision. This is what I have decided."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)