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mahabharat 12.199.89: विकृत व्यक्ति बोला, "हे प्रभु! इस विकृत व्यक्ति का मुझ पर कोई ऋण नहीं है। यह आपसे झूठ बोल रहा है। इसकी बातों में केवल थोड़ी सी सच्चाई है।" 89   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  12.199.89 
विकृत उवाच
न मे धारयते किञ्चिद् विरूपोऽयं नराधिप।
मिथ्या ब्रवीत्ययं हि त्वां सत्याभासं नराधिप॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
विकृत व्यक्ति बोला, "हे प्रभु! इस विकृत व्यक्ति का मुझ पर कोई ऋण नहीं है। यह आपसे झूठ बोल रहा है। इसकी बातों में केवल थोड़ी सी सच्चाई है।" 89
 
The deformed man said, "O Lord! I have no debt to this deformed person. He is lying to you. There is only a hint of truth in his words." 89
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)