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mahabharat 12.199.86: दूसरे ने कहा, "मैं सच कह रहा हूँ, तुम पर मेरा कोई कर्ज़ नहीं है।" पहले ने कहा, "तुम झूठ बोल रहे हो। मुझ पर तुम्हारा कुछ कर्ज़ है।" 86   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  12.199.86 
सत्यं ब्रवीम्यहमिदं न मे धारयते भवान्।
अनृतं वदसीह त्वमृणं ते धारयाम्यहम्॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
दूसरे ने कहा, "मैं सच कह रहा हूँ, तुम पर मेरा कोई कर्ज़ नहीं है।" पहले ने कहा, "तुम झूठ बोल रहे हो। मुझ पर तुम्हारा कुछ कर्ज़ है।" 86
 
The second one said, "I am telling the truth, you do not owe me anything." The first one said, "You are lying. I owe you something." 86
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)