Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.85: एक ने कहा, "भाई! मुझ पर तुम्हारा कोई कर्ज़ नहीं है।" दूसरे ने कहा, "नहीं, मैं तुम्हारा ऋणी हूँ।" पहले ने कहा, "यहाँ हमारे बीच जो झगड़ा है, उसका फैसला राजा करेगा जो इन सब पर शासन करता है।" 85. | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मे धारयसीत्येको धारयामीति चापर:।
इहास्ति नौ विवादोऽयमयं राजानुशासक:॥ ८५॥
अनुवाद
एक ने कहा, "भाई! मुझ पर तुम्हारा कोई कर्ज़ नहीं है।" दूसरे ने कहा, "नहीं, मैं तुम्हारा ऋणी हूँ।" पहले ने कहा, "यहाँ हमारे बीच जो झगड़ा है, उसका फैसला राजा करेगा जो इन सब पर शासन करता है।" 85.
One said, "Brother! I do not owe you anything." The other said, "No, I am indebted to you." The first said, "The dispute between us here will be decided by the king who rules over all these." 85.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥