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mahabharat 12.199.82: ब्राह्मणों को दान लेने का अधिकार है और क्षत्रिय केवल दान देते हैं, उसे स्वीकार नहीं करते। तुमने इस सिद्धांत के बारे में अवश्य सुना होगा। इसलिए हे ब्राह्मण! हमारे कर्मों का फल हम दोनों के लिए एक साथ उपयोगी होना चाहिए। 82.   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  12.199.82 
द्विजा: प्रतिग्रहे युक्ता दातारो राजवंशजा:।
यदि धर्म: श्रुतो विप्र सहैव फलमस्तु नौ॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों को दान लेने का अधिकार है और क्षत्रिय केवल दान देते हैं, उसे स्वीकार नहीं करते। तुमने इस सिद्धांत के बारे में अवश्य सुना होगा। इसलिए हे ब्राह्मण! हमारे कर्मों का फल हम दोनों के लिए एक साथ उपयोगी होना चाहिए। 82.
 
Brahmins have the right to accept gifts and Kshatriyas only give gifts, they do not accept them. You must have heard about this principle. Therefore, O Brahmin, the fruits of our actions should be of use to both of us together. 82.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)