Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.80: राजन! मैं त्याग पथ का पथिक हूँ, आप मुझे इतने दिनों से क्यों बहका रहे हैं? हे मनुष्यों के स्वामी! मैं अपना कर्तव्य स्वयं करूँगा, मुझे आपसे कोई फल नहीं चाहिए। मैं सभी प्रकार के दानों से निवृत्त होकर तप और स्वाध्याय में लगा हुआ हूँ। 80. | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! मैं त्याग पथ का पथिक हूँ, आप मुझे इतने दिनों से क्यों बहका रहे हैं? हे मनुष्यों के स्वामी! मैं अपना कर्तव्य स्वयं करूँगा, मुझे आपसे कोई फल नहीं चाहिए। मैं सभी प्रकार के दानों से निवृत्त होकर तप और स्वाध्याय में लगा हुआ हूँ। 80.
King! I am a traveller on the path of renunciation, why are you trying to entice me for so long? O Lord of men! I will do my duty myself, I do not want any reward from you. Having retired from all kinds of gifts, I am engaged in penance and self-study. 80.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥