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mahabharat 12.199.78: राजा ने कहा, "मुझे स्वर्ग की कोई आवश्यकता नहीं है। स्वर्ग! जिस रास्ते से आए हो, उसी रास्ते से वापस जाओ। यदि ये ब्राह्मण स्वर्ग जाना चाहते हैं, तो उन्हें मेरे पुण्यों का फल स्वीकार करना चाहिए।" 78   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  12.199.78 
राजोवाच
कृतं स्वर्गेण मे कार्यं गच्छ स्वर्ग यथागतम्।
विप्रो यदीच्छते गन्तुं चीर्णं गृह्णातु मे फलम्॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा, "मुझे स्वर्ग की कोई आवश्यकता नहीं है। स्वर्ग! जिस रास्ते से आए हो, उसी रास्ते से वापस जाओ। यदि ये ब्राह्मण स्वर्ग जाना चाहते हैं, तो उन्हें मेरे पुण्यों का फल स्वीकार करना चाहिए।" 78
 
The king said, "I have no need for heaven. Heaven! Go back the way you came. If these Brahmins want to go to heaven, they should accept the fruits of my good deeds." 78
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)