Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.73: जो देने का वचन देकर फिर देने से इन्कार कर देता है, तथा जो मांगने पर भीख मांगकर देने पर भी स्वीकार नहीं करता, वे दोनों ही झूठे हैं। अतः तुम अपने विषय में या मेरे विषय में झूठ मत बोलो। | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संश्रुत्य यो न दित्सेत याचित्वा यश्च नेच्छति।
उभावानृतिकावेतौ न मृषा कर्तुमर्हसि॥ ७३॥
अनुवाद
जो देने का वचन देकर फिर देने से इन्कार कर देता है, तथा जो मांगने पर भीख मांगकर देने पर भी स्वीकार नहीं करता, वे दोनों ही झूठे हैं। अतः तुम अपने विषय में या मेरे विषय में झूठ मत बोलो।
He who promises to give and then refuses to give and he who begs for something but does not accept it when it is available, both are liars; therefore, do not tell lies about yourself or me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥