Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.72: हे मनुष्यों के स्वामी! यदि तुम मेरे द्वारा दिए गए इस मन्त्र का फल स्वीकार नहीं करोगे तो तुम अधर्मी हो जाओगे और समस्त लोकों में भटकोगे। | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि जप्यफलं दत्तं मया नैषिष्यसे नृप।
धर्मेभ्य: सम्परिभ्रष्टो लोकाननुचरिष्यसि॥ ७२॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! यदि तुम मेरे द्वारा दिए गए इस मन्त्र का फल स्वीकार नहीं करोगे तो तुम अधर्मी हो जाओगे और समस्त लोकों में भटकोगे।
O Lord of men! If you do not accept the fruits of this mantra offered by me, then you will become irreligious and will wander around in all the worlds. 72.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥