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mahabharat 12.199.70: जहाँ धर्म है, वहाँ सत्य है। सत्य से ही सब कुछ बढ़ता है। हे राजन! तुम असत्य का आचरण क्यों करना चाहते हो?॥ 70॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  12.199.70 
यतो धर्मस्तत: सत्यं सर्वं सत्येन वर्धते।
किमर्थमनृतं कर्म कर्तुं राजंस्त्वमिच्छसि॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
जहाँ धर्म है, वहाँ सत्य है। सत्य से ही सब कुछ बढ़ता है। हे राजन! तुम असत्य का आचरण क्यों करना चाहते हो?॥ 70॥
 
Where there is Dharma, there is truth. Everything grows through truth. O King! Why do you want to behave untruthfully?॥ 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)