Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.7: कहते हैं कि देवी सावित्री उसके जप से प्रसन्न होकर उसके सामने प्रकट हुईं और बोलीं कि वे उससे प्रसन्न हैं। ब्राह्मण अपनी वेद संहिता से गायत्री मंत्र का जाप कर रहा था, इसलिए सावित्री देवी के आने पर भी वह चुपचाप बैठा रहा। उसने उनसे कुछ नहीं कहा। | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स देव्या दर्शित: साक्षात् प्रीतास्मीति तदा किल।
जप्यमावर्तयंस्तूष्णीं न स तां किञ्चिदब्रवीत्॥ ७॥
अनुवाद
कहते हैं कि देवी सावित्री उसके जप से प्रसन्न होकर उसके सामने प्रकट हुईं और बोलीं कि वे उससे प्रसन्न हैं। ब्राह्मण अपनी वेद संहिता से गायत्री मंत्र का जाप कर रहा था, इसलिए सावित्री देवी के आने पर भी वह चुपचाप बैठा रहा। उसने उनसे कुछ नहीं कहा।
It is said that Goddess Savitri, pleased with his chanting, appeared before him and said that she was pleased with him. The Brahmin was reciting the Gayatri Mantra from his Veda Samhita; therefore, even when Savitri Devi came, he remained sitting quietly. He did not say anything to her.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥