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mahabharat 12.199.69: मैंने सुना है कि एक समय धर्म और सत्य को बराबर पलड़ों पर रखकर तौला गया; जिस पलड़े पर सत्य रखा गया, वह पलड़ा भारी था।   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  12.199.69 
तुलामारोपितो धर्म: सत्यं चैवेति न: श्रुतम्।
समकक्षां तुलयतो यत: सत्यं ततोऽधिकम्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
मैंने सुना है कि एक समय धर्म और सत्य को बराबर पलड़ों पर रखकर तौला गया; जिस पलड़े पर सत्य रखा गया, वह पलड़ा भारी था।
 
I have heard that once upon a time Dharma and Satya were placed on a scale with equal sides and weighed; the side on which Truth was placed was heavier.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)