Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.6: उन्होंने संहिता का अर्थ पूर्णतः समझकर उसका जप करना आरम्भ किया और अपनी इन्द्रियों को वश में करके ब्राह्मण के योग्य तपस्या करने लगे। उन्होंने नियमित जप और तपस्या करते हुए एक हजार वर्ष व्यतीत कर दिए। | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्होंने संहिता का अर्थ पूर्णतः समझकर उसका जप करना आरम्भ किया और अपनी इन्द्रियों को वश में करके ब्राह्मण के योग्य तपस्या करने लगे। उन्होंने नियमित जप और तपस्या करते हुए एक हजार वर्ष व्यतीत कर दिए।
He started chanting the Samhita with full knowledge of its meaning and by controlling his senses, he started performing austerities befitting a Brahmin. He spent a thousand years doing the regular chanting and penance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥