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mahabharat 12.199.59: मैंने बिना कुछ सोचे-समझे पहले देने की प्रतिज्ञा की है; अतः तुम्हें भी बिना विचारे मेरा प्रस्ताव स्वीकार कर लेना चाहिए। यदि तुम सत्य पर दृढ़ हो, तो तुम्हें ऐसा अवश्य करना चाहिए॥ 59॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  12.199.59 
संश्रुतं च मया पूर्वं ददानीत्यविचारितम्।
तद् गृह्णीष्वाविचारेण यदि सत्ये स्थितो भवान्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
मैंने बिना कुछ सोचे-समझे पहले देने की प्रतिज्ञा की है; अतः तुम्हें भी बिना विचारे मेरा प्रस्ताव स्वीकार कर लेना चाहिए। यदि तुम सत्य पर दृढ़ हो, तो तुम्हें ऐसा अवश्य करना चाहिए॥ 59॥
 
I have pledged to give it first without thinking anything; therefore you too should accept my offer without thinking. If you are firm on truth, then you must do so.॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)