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mahabharat 12.199.56: तुमने कहा, 'दे दो' और मैंने कहा, 'मैं दूँगा' - ऐसी स्थिति में मैं झूठ नहीं बोलूँगा। तुम सत्य की रक्षा करो और उसके लिए स्थिर रहो॥ 56॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.199.56 
ददस्वेति त्वया चोक्तं ददानीति मया तथा।
न वाचं दूषयिष्यामि सत्यं रक्ष स्थिरो भव॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
तुमने कहा, 'दे दो' और मैंने कहा, 'मैं दूँगा' - ऐसी स्थिति में मैं झूठ नहीं बोलूँगा। तुम सत्य की रक्षा करो और उसके लिए स्थिर रहो॥ 56॥
 
You said, 'Give it' and I said, 'I will give it'-in such a situation I will not lie. You should protect the truth and become stable for it.॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)