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mahabharat 12.199.52: ब्राह्मण ने कहा, "हे राजन! इस जप का क्या फल होगा? यह मैं नहीं जानता; परन्तु जो कुछ मैंने जप किया था, वह मैंने आपको दे दिया है। धर्म, यम, मृत्यु और काल इसके साक्षी हैं।"   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  12.199.52 
ब्राह्मण उवाच
फलप्राप्तिं न जानामि दत्तं यज्जपितं मया।
अयं धर्मश्च कालश्च यमो मृत्युश्च साक्षिण:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने कहा, "हे राजन! इस जप का क्या फल होगा? यह मैं नहीं जानता; परन्तु जो कुछ मैंने जप किया था, वह मैंने आपको दे दिया है। धर्म, यम, मृत्यु और काल इसके साक्षी हैं।"
 
The Brahmin said, "O King! What will be the result of this chanting? I do not know this; but whatever I had chanted, I have given it to you. Dharma, Yama, Mrityu and Kaal are the witnesses to this. 52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)