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mahabharat 12.199.51: राजा ने कहा- ब्राह्मण! मैंने जो जप किया था, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हो गई हैं। तुम्हारा कल्याण हो और तुम धन्य हो। मैं तो चला जाता हूँ; परन्तु कृपा करके मुझे बताओ कि इसका फल क्या है?॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.199.51 
राजोवाच
कृतं सर्वेण भद्रं ते जप्यं यद् याचितं मया।
स्वस्ति तेऽस्तु गमिष्यामि किञ्च तस्य फलं वद॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा- ब्राह्मण! मैंने जो जप किया था, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हो गई हैं। तुम्हारा कल्याण हो और तुम धन्य हो। मैं तो चला जाता हूँ; परन्तु कृपा करके मुझे बताओ कि इसका फल क्या है?॥ 51॥
 
The king said-Brahmin! All the wishes of the chanting I had asked for have been fulfilled. May you be blessed and blessed. I will leave; but please tell me what the result is?॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)