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mahabharat 12.199.49-50: ब्राह्मण बोला - "हे राजन! मेरे द्वारा किये गये जप का जो उत्तम फल है, उसे आप स्वीकार करें। आप मेरे जप का आधा फल बिना विचारे ही प्राप्त कर लें अथवा यदि आप मेरे द्वारा किये गये जप का सम्पूर्ण फल चाहते हैं, तो अपनी इच्छानुसार अवश्य प्राप्त करें।" ॥49-50॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  12.199.49-50 
ब्राह्मण उवाच
परमं गृह्यतां तस्य फलं यज्जपितं मया।
अर्धं त्वमविचारेण फलं तस्य ह्यवाप्नुहि॥ ४९॥
अथवा सर्वमेवेह मामकं जापकं फलम्।
राजन् प्राप्नुहि कामं त्वं यदि सर्वमिहेच्छसि॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण बोला - "हे राजन! मेरे द्वारा किये गये जप का जो उत्तम फल है, उसे आप स्वीकार करें। आप मेरे जप का आधा फल बिना विचारे ही प्राप्त कर लें अथवा यदि आप मेरे द्वारा किये गये जप का सम्पूर्ण फल चाहते हैं, तो अपनी इच्छानुसार अवश्य प्राप्त करें।" ॥49-50॥
 
The Brahmin said, "O King! Please accept the best result of the chanting I have done. You may receive half the result of my chanting without any consideration or if you want the entire result of the chanting done by me, then you may certainly receive it according to your wish. ॥ 49-50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)