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mahabharat 12.199.48: राजा ने कहा - मुनि! यदि आप देना ही चाहते हैं तो पूरे सौ वर्षों तक जप करके जो फल प्राप्त किया है, वह मुझे दे दीजिए।   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  12.199.48 
राजोवाच
यत्तद् वर्षशतं पूर्णं जप्यं वै जपता त्वया।
फलं प्राप्तं तत् प्रयच्छ मम दित्सुर्भवान् यदि॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा - मुनि! यदि आप देना ही चाहते हैं तो पूरे सौ वर्षों तक जप करके जो फल प्राप्त किया है, वह मुझे दे दीजिए।
 
The king said - Muni! If you really want to give, then give me the fruits you have received by chanting for a full hundred years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)