Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.199.45: ब्राह्मण बोला, "हे राजन! आप तो बढ़ा-चढ़ाकर कह रहे थे कि मेरे शब्द सदैव युद्ध के लिए ही होते हैं। फिर आप मुझसे भी युद्ध के लिए ही क्यों नहीं कहते?"   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  12.199.45 
ब्राह्मण उवाच
युद्धं मम सदा वाणी याचतीति विकत्थसे।
न च युद्धं मया सार्धं किमर्थं याचसे पुन:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण बोला, "हे राजन! आप तो बढ़ा-चढ़ाकर कह रहे थे कि मेरे शब्द सदैव युद्ध के लिए ही होते हैं। फिर आप मुझसे भी युद्ध के लिए ही क्यों नहीं कहते?"
 
The Brahmin said, "O King! You were exaggerating that my words always plead for war. Then why are you not pleading for war with me as well?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)