Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.43: ब्राह्मण बोला - हे प्रभु! जैसे आप अपने धर्म से संतुष्ट हैं, वैसे ही हम भी अपने धर्म से संतुष्ट हैं। हम दोनों में कोई भेद नहीं है। अतः आप जो चाहें करें। | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण उवाच
तुष्यसि त्वं स्वधर्मेण तथा तुष्टा वयं नृप।
अन्योन्यस्यान्तरं नास्ति यदिष्टं तत् समाचर॥ ४३॥
अनुवाद
ब्राह्मण बोला - हे प्रभु! जैसे आप अपने धर्म से संतुष्ट हैं, वैसे ही हम भी अपने धर्म से संतुष्ट हैं। हम दोनों में कोई भेद नहीं है। अतः आप जो चाहें करें।
The Brahmin said - O Lord! Just as you are satisfied with your religion, we are also satisfied with our religion. There is no difference between us. So do whatever you like.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥