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mahabharat 12.199.36: महान राजा इक्ष्वाकु ऋषि ने उन सभी को प्रणाम किया, उनकी पूजा की और उनका कुशलक्षेम पूछा।   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.199.36 
सर्वानेव तु राजर्षि: सम्पूज्याथ प्रणम्य च।
कुशलप्रश्नमकरोत् सर्वेषां राजसत्तम:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
महान राजा इक्ष्वाकु ऋषि ने उन सभी को प्रणाम किया, उनकी पूजा की और उनका कुशलक्षेम पूछा।
 
The great king, Sage Ikshvaku, bowed to them all, worshipped them, and inquired about their well-being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)