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mahabharat 12.199.27: ब्राह्मण बोला—हे महात्मन! मुझे कीर्तन में सुख मिलता है। अनन्त लोकों से मेरा क्या सम्बन्ध है? हे प्रभु! कृपया मुझे बताइए, क्या मैं इस भौतिक शरीर से स्वर्ग जा सकता हूँ या नहीं?॥27॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.199.27 
ब्राह्मण उवाच
रमे जपन् महाभाग किं नु लोकै: सनातनै:।
सशरीरेण गन्तव्यं मया स्वर्गं न वा विभो॥ २७॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण बोला—हे महात्मन! मुझे कीर्तन में सुख मिलता है। अनन्त लोकों से मेरा क्या सम्बन्ध है? हे प्रभु! कृपया मुझे बताइए, क्या मैं इस भौतिक शरीर से स्वर्ग जा सकता हूँ या नहीं?॥27॥
 
The Brahmin said—O great one! I find happiness in chanting. What do I have to do with the eternal worlds? O Lord! Please tell me, can I go to heaven in my physical body or not?॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)