Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.199.25: ब्राह्मण ने कहा, "हे प्रभु! मैं इस शरीर के बिना स्वर्ग में रहना नहीं चाहता; इसलिए हे धर्मदेव! आप यहाँ से चले जाइए। इस शरीर को छोड़कर स्वर्ग जाने की मेरी तनिक भी इच्छा नहीं है।"   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.199.25 
ब्राह्मण उवाच
न रोचये स्वर्गवासं विना देहमहं विभो।
गच्छ धर्म न मे श्रद्धा स्वर्गं गन्तुं विनाऽऽत्मना॥ २५॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने कहा, "हे प्रभु! मैं इस शरीर के बिना स्वर्ग में रहना नहीं चाहता; इसलिए हे धर्मदेव! आप यहाँ से चले जाइए। इस शरीर को छोड़कर स्वर्ग जाने की मेरी तनिक भी इच्छा नहीं है।"
 
The Brahmin said, "O Lord! I do not wish to live in heaven without this body; therefore, O Dharmadev! You should go from here. I do not have the slightest desire to leave this body and go to heaven." 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)