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mahabharat 12.199.22: मुने! अब तुम प्राण त्यागकर इच्छित लोकों में जाओ। शरीर त्यागने के बाद ही तुम उन तीर्थों को जाओगे। 22॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.199.22 
प्राणत्यागं कुरु मुने गच्छ लोकान् यथेप्सितान्।
त्यक्त्वाऽऽत्मन: शरीरं च ततो लोकानवाप्स्यसि॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मुने! अब तुम प्राण त्यागकर इच्छित लोकों में जाओ। शरीर त्यागने के बाद ही तुम उन तीर्थों को जाओगे। 22॥
 
Mune! Now you give up your life and go to the desired worlds. You will go to those holy places only after abandoning your body. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)