Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.127: अथवा वह उत्तम लोकों को भी नरक के समान देखता है और अन्य सब वस्तुओं से रहित तथा समस्त कामनाओं से रहित होकर उसी निर्गुण ब्रह्म में सुखपूर्वक रमण करता है ॥127॥ | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथवा वह उत्तम लोकों को भी नरक के समान देखता है और अन्य सब वस्तुओं से रहित तथा समस्त कामनाओं से रहित होकर उसी निर्गुण ब्रह्म में सुखपूर्वक रमण करता है ॥127॥
Or he sees even the best worlds as hell and, being free from everything else and free from all desires, happily rejoices in the same Nirguna Brahma. 127॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥