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mahabharat 12.199.126: यदि उसके मन में सांसारिक सुखों के प्रति आसक्ति है और वह निर्गुण ब्रह्म को प्राप्त करने की इच्छा नहीं रखता, तो वह सम्पूर्ण पवित्र लोकों का स्वामी हो जाता है और जो कुछ भी वह मन में प्राप्त करने की इच्छा रखता है, उसे वह तत्काल प्राप्त कर लेता है ॥126॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  12.199.126 
अथ नेच्छति रागात्मा सर्वं तदधितिष्ठति।
यच्च प्रार्थयते तच्च मनसा प्रतिपद्यते॥ १२६॥
 
 
अनुवाद
यदि उसके मन में सांसारिक सुखों के प्रति आसक्ति है और वह निर्गुण ब्रह्म को प्राप्त करने की इच्छा नहीं रखता, तो वह सम्पूर्ण पवित्र लोकों का स्वामी हो जाता है और जो कुछ भी वह मन में प्राप्त करने की इच्छा रखता है, उसे वह तत्काल प्राप्त कर लेता है ॥126॥
 
If he has attachment for worldly pleasures in his mind and he does not wish to attain the Nirguna Brahman, then he becomes the lord of all the holy worlds and whatever he wishes to attain in his mind, he immediately obtains it. ॥126॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)