Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.125: जप करनेवाला पूर्वोक्त परब्रह्म (सगुण ब्रह्म) से ऊपर उठकर आकाशरूपी निर्गुण ब्रह्म को प्राप्त होता है । प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमा और शब्द - इन चार प्रमाणों और लक्षणों तक उसकी पहुँच नहीं रहती । भूख, प्यास, शोक, मोह और मृत्यु-ये छह तरंगें वहाँ नहीं रहतीं । पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, पाँच प्राण और मन - इन सोलह साधनों से भी वह मुक्त हो जाता है । 125॥ | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चतुर्भिर्लक्षणैर्हीनं तथा षड्भि: सषोडशै:।
पुरुषं तमतिक्रम्य आकाशं प्रतिपद्यते॥ १२५॥
अनुवाद
जप करनेवाला पूर्वोक्त परब्रह्म (सगुण ब्रह्म) से ऊपर उठकर आकाशरूपी निर्गुण ब्रह्म को प्राप्त होता है । प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमा और शब्द - इन चार प्रमाणों और लक्षणों तक उसकी पहुँच नहीं रहती । भूख, प्यास, शोक, मोह और मृत्यु-ये छह तरंगें वहाँ नहीं रहतीं । पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, पाँच प्राण और मन - इन सोलह साधनों से भी वह मुक्त हो जाता है । 125॥
The chanter rises above the aforesaid Supreme Being (Sagun Brahma) and attains Nirguna Brahma in the form of sky. There is no access to these four evidences and symptoms – direct, inference, analogy and words. Hunger, thirst, sorrow, attachment and death and death – these six waves are not there. The five senses of knowledge, the five senses of action, the five vital organs and the mind - he is also free from these sixteen instruments. 125॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥