Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.123: अन्य लोकों की अपेक्षा भगवान् की भक्ति की प्राप्ति अमृत है। इससे भी उत्तम कैवल्य अमृत को प्राप्त होकर वह शान्त (निःस्वार्थ), अहंकाररहित, द्वन्द्वरहित, सुखी, शान्तिप्रिय तथा रोग-शोक से मुक्त हो जाता है। 123॥ | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्य लोकों की अपेक्षा भगवान् की भक्ति की प्राप्ति अमृत है। इससे भी उत्तम कैवल्य अमृत को प्राप्त होकर वह शान्त (निःस्वार्थ), अहंकाररहित, द्वन्द्वरहित, सुखी, शान्तिप्रिय तथा रोग-शोक से मुक्त हो जाता है। 123॥
Compared to other worlds, the attainment of God's devotion is nectar. After attaining the even more excellent nectar of Kaivalya, he becomes calm (selfless), egoless, conflict-free, happy, peace-loving and free from diseases and sorrows. 123॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥