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mahabharat 12.199.119: जो द्विज स्वयं संहिता का अध्ययन करता है, वह परब्रह्म को प्राप्त होता है अथवा अग्नि में लीन हो जाता है अथवा सूर्य में प्रवेश करता है ॥119॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  12.199.119 
प्रयाति संहिताध्यायी ब्रह्माणं परमेष्ठिनम्।
अथवाग्निं समायाति सूर्यमाविशतेऽपि वा॥ ११९॥
 
 
अनुवाद
जो द्विज स्वयं संहिता का अध्ययन करता है, वह परब्रह्म को प्राप्त होता है अथवा अग्नि में लीन हो जाता है अथवा सूर्य में प्रवेश करता है ॥119॥
 
A Dwija who studies the Samhita on his own attains Supreme Lord Brahma or gets absorbed in the fire or enters the Sun. 119॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)